खादी के वैश्वीकरण पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन -अमीरी-गरीबी का भेद मिटाती है खादी - मुख्यमंत्री

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जयपुर, 31 जनवरी। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा कि खादी अमीरी-गरीबी और जाति-धर्म का भेद मिटाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के सत्य, अपरिग्रह, अहिंसा और सादगी के सिद्धांतों को खादी मूर्त रूप प्रदान करती है। हम सभी को खादी को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए और युवा पीढ़ी को भी इससे जोड़ना चाहिए। 

श्री गहलोत गुरूवार को हरिशचंद्र माथुर राज्य लोक प्रशिक्षण संस्थान में खादी के वैश्वीकरण पर दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खादी केवल वस्त्र नहीं बल्कि स्वाभिमान और सम्मान का कारण है। खादी को लेकर आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन से खादी के प्रति नई पीढ़ी में रूचि जागृत होगी और खादी को एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में जो भी सुझाव आएंगे राज्य सरकार उन पर अमल करने का पूरा प्रयास करेगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रोजगार का एक बड़ा माध्यम होने के साथ ही महिला सशक्तीकरण का भी प्रमुख जरिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने खादी एवं खादी संस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए खादी वस्त्रों पर राजस्थान में 50 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया, जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। 
श्री गहलोत ने कहा कि खादी के क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं में नई पीढ़ी का रूझान कम देखने को मिलता है। आज गांवों में रोजगार कम हो रहे हैं और बुनकर एवं कातिनों की संख्या भी लगातार कम हो रही है। ऎसे में राज्य सरकार का प्रयास रहेगा कि ऎसी योजनाएं बनाई जाएं जिससे रोजगार भी बढ़े और बुनकरों-कातिनों की तादाद बढ़ सके। हमारा प्रयास होना चाहिए कि नई पीढ़ी को खादी से जोड़ा जाए उन्होंने कहा कि गांधी जी की 150वीं जयन्ती वर्ष के कार्यक्रम प्रदेश में 2 अक्टूबर, 2020 तक आयोजित किए जाने का उद्देश्य यही है कि गांधी जी के विचार जन-जन तक पहुंचे और युवा इनसे प्रेरणा ले सकें। 

उद्योग मंत्री श्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री का गांधी जी एवं खादी के प्रति विशेष लगाव है। प्रदेश में पहला अवसर है जब खादी वस्त्रों पर 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि नए बुनकर और नए कातिन तैयार हों ताकि नई पीढ़ी खादी के महत्व को समझे। 

मुख्य सचिव श्री डीबी गुप्ता ने कहा कि खादी का रिश्ता हमारे इतिहास और परम्पराओं से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी और आजादी को एक-दूसरे का पूरक बना दिया था। खादी को आगे बढ़ाने के लिए इसे आधुनिक फैशन के अनुरूप बदलना होगा। 

अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग श्री सुबोध अग्रवाल ने कहा कि खादी को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने रिवॉल्विंग फंड 3 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया है। बीकानेर में खादी प्लाजा का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही खादी की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए ऑनलाइन कम्पनियाें के प्लेटफॉर्म का भी उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। 

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व चैयरमेन श्री लक्ष्मीदास ने कहा कि गांधी जी के 18 रचनात्मक कार्यों के तारामण्डल में खादी का स्थान सूर्य की भांति है। खादी सीआईसी, लंदन की नॉन एग्जीक्यूटिव बोर्ड मैम्बर जॉ साल्टर ने कहा कि लोग अक्सर जानना चाहते हैं कि जो कपड़े वे पहनते हैं उन्हें तैयार कौन करता है। हमारा प्रयास रहता है कि हम उन लोगाेंं को बढ़ावा दें जो खादी के कपड़े तैयार करते हैं। मोरल फाइबर फेब्रिक्स की संस्थापक शालिनी सेठ अमीन ने कहा कि खादी के कपड़े पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हैं। हमें जरूरत आज खादी के उत्पादन को बढ़ाने की है। 

ग्राम भारती समिति के अध्यक्ष श्री भवानी शंकर कुसुम ने कहा कि सूती कपड़े की परम्परा सिंधु सभ्यता के समय से है। गांधी जी के समय खादी को नया आयाम मिला और आज यह अंतर्राष्ट्रीय फलक पर पहुंच गई है। जानी-मानी फैशन डिजाइनर रितु बैरी ने कहा कि खादी ग्लोबल फेब्रिक के रूप में अपनी पहचान बना रही है। यह सामाजिक समानता का प्रतीक है। 

स्वागत उद्बोधन देते हुए सीआईआई राजस्थान के चैयरमेन श्री आनंद मिश्रा ने कहा कि खादी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उत्पादन क्षमता के साथ इसकी गुणवत्ता बढ़ाने पर भी काम होना चाहिए। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खादी सीआईसी लंदन की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया। सम्मेलन के संयोजक श्री जीएस बाफना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में खादी संस्थाओं से जुड़ी देश-विदेश की जानी-मानी हस्तियां, डिजाइनर्स एवं बुनकर और कातिन सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।