विश्व पर्यावरण दिवस: भारतीय सीमेंट उद्योग ने दोहराई नेट ज़ीरो और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता

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जयपुर, जून 2026.

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएमए) ने भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्यों और सतत विकास एजेंडे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। एसोसिएशन का कहना है कि भारतीय सीमेंट उद्योग स्वच्छ तकनीकों को अपनाने, संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने, सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उद्योग का मानना है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए भारत की बुनियादी ढांचा आवश्यकताओं को पूरा करना उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस अवसर पर सीएमए के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने उद्योग द्वारा स्थिरता, नवाचार और डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर अपने विचार साझा किए।

श्री पार्थ जिंदल, अध्यक्ष, सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएमए) तथा मैनेजिंग डायरेक्टर, जेएसडब्ल्यू सीमेंट लिमिटेडने कहा,"सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएमए) भारत सरकार की उस प्रतिबद्धता की सराहना करता है, जिसमें वह नेट ज़ीरो हासिल करने और ऐसा नीति-पर्यावरण बनाने के लिए काम कर रही है, जो स्थिरता, नवाचार और जिम्मेदार औद्योगिक विकास को बढ़ावा दे। भारतीय सीमेंट उद्योग कार्बन उत्सर्जन कम करने के सरकार के लक्ष्यों के साथ पूरी तरह जुड़ा हुआ है। यह उद्योग साफ-सुथरी तकनीकों, संसाधनों के बेहतर उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़ी प्रथाओं को तेजी से अपना रहा है, साथ ही डीकार्बोनाइज़ेशन की दिशा में एक अहम रास्ते के रूप में कार्बन कैप्चर, यूटिलाइज़ेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) की संभावनाओं को भी सक्रिय रूप से देख रहा है।

स्थिरता की सबसे मजबूत बातों में से एक यह है कि एक क्षेत्र का कचरा दूसरे क्षेत्र के लिए संसाधन बन सकता है। औद्योगिक उप-उत्पादों और ऐसे अपशिष्ट प्रवाहों की को-प्रोसेसिंग करके, जिन्हें सामान्य तौर पर निपटाने की जरूरत होती, भारतीय सीमेंट उद्योग सामग्री चक्र को पूरा करने, प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और एक साथ कई क्षेत्रों के पर्यावरणीय असर को कम करने में मदद करता है।

इसके साथ ही, सीमेंट उद्योग ने ऊर्जा दक्षता सुधारने, वैकल्पिक ईंधनों और कच्चे माल के इस्तेमाल को बढ़ाने और अपने पर्यावरणीय असर को कम करने में भी बड़ी प्रगति की है। स्थिरता हमारे उत्पादन के तरीके में लंबे समय से शामिल रही है और अब यह तेजी से तय कर रही है कि हम नवाचार, निवेश और विकास कैसे करें। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, भारतीय सीमेंट उद्योग भारत की विकास संबंधी आकांक्षाओं को समर्थन देने और उसके जलवायु तथा स्थिरता लक्ष्यों में सार्थक योगदान देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।"

डॉ. राघवपत सिंघानिया, उपाध्यक्ष, सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन तथा मैनेजिंग डायरेक्टर, जेके सीमेंट लिमिटेडने कहा,"भारत की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता और नेट ज़ीरो की दिशा में उसकी महत्वाकांक्षाएं साफ तकनीकों और ज्यादा संसाधन-कुशल औद्योगिक तरीकों को अपनाने की रफ्तार बढ़ा रही हैं। बिल्ट एनवायरनमेंट में स्थिरता को सिर्फ उत्सर्जन से नहीं मापा जा सकता। यह भी उतना ही जरूरी है कि हम संसाधनों का कितनी कुशलता से इस्तेमाल करते हैं, कचरे को कितनी प्रभावी तरह से कम करते हैं और भविष्य की पीढ़ियों के काम आने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर कितनी जिम्मेदारी से बनाते हैं।

भारत के विकास की नींव रखने वाले क्षेत्र के रूप में, भारतीय सीमेंट उद्योग की यह जिम्मेदारी है कि वह विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखे।

भारतीय सीमेंट उद्योग इस लक्ष्य की दिशा में ज्यादा संसाधन-कुशलता, सर्कुलरिटी बढ़ाने, लगातार तकनीकी नवाचार और उत्पादन पद्धतियों में सुधार के जरिए आगे बढ़ रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, हम भारत की जलवायु महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने और ऐसा मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाला इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।"