केंद्रीय बजट 2023-24 देश भर के सहकारिता समितियों के लिए करेगा संजीवनी का काम

2023-24

नई दिल्ली, फरवरी  06, 2023.

प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में 'अमृत काल' का पहला केंद्रीय बजट 2023-24 आत्मनिर्भर भारत की आकांक्षाओं और संकल्प को पूरा करने की दिशा में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय है। निम्न मध्यम वर्गों, कारीगरों, महिलाओं और किसानों के विकास से संबंधित यह बजट जहाँ भारत को दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपना मुकाम बनाए रखने में मदद करेगा, वहीं सहकारिता क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने में संजीवनी की तरह काम करेगा।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि, “जिस तरह से इस बजट में दुनिया की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत भंडारण क्षमता की स्थापना की घोषणा की गई है, वह सहकारिता की दिशा और दशा बदलने वाला निर्णय है। इससे किसान अपनी उपज का भंडारण कर सकेंगे और उचित समय पर बेच कर लाभकारी मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।यह बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

देश के सभी पंचायतों तकसहकारिता की आत्मापैक्स का दायरा बढ़ाने औरग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़सहकारिता क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कई निर्णायक कदम उठाए हैं। हाल ही में पैक्स को मजबूती प्रदान करने के लिए सहकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नाबार्ड और कॉमन सर्विस सेंटर -गवर्नेंस सर्विसेज़ इंडिया लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है।

इस मौके पर अपने संबोधन में श्री शाह ने कहा कि, पैक्स को 20 सेवाओं का प्रदाता बनाकर बहुउद्देशीय बनाने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कृषि विकास में पैक्स की भूमिका और उसका योगदान बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। उन्होंने इस समझौते को विन-विन सिचुएशन बताते हुए कहा कि इससे सहकार से समृद्धि और सहकारिता को ग्रामीण विकास की रीढ़ बनाने का सपना साकार हो सकेगा। 

इस समझौते से अब पैक्स देश के सूदूर गाँवों में भी अपनी सेवाएँ मुहैया कर पाएगा। पैक्स अब जल वितरण, भंडारण, बैंक मित्र समेत 20 अलग-अलग गतिविधियों का संचालन कर आम जन को सुविधा दे पाएगा। सामान्य सेवा केंद्रों पर उपलब्ध की जा रही सेवाओं को पैक्स के माध्यम से गाँव-गाँव तक पहुँचाने की कवायद लगातार जारी है। इस दिशा में अगले 5 साल में 2 लाख से अधिक पैक्स का निर्माण किया जाएगा। वर्तमान में कार्यरत पैक्स का कंप्यूटरीकरण भी शुरू हो गया है।

साथ ही, उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है जहाँ पैक्स नहीं है और उस गैप को भरने के लिए नेशनल डेटाबेस का निर्माण भी किया जा रहा है।

 

बता दें कि केंद्रीय बजट 2023-24 में जिन योजनाओं को लाया गया है, उसके तहत आने वाले वर्षों में पैक्स के जरिए किसान ग्रामीण आबादी को 300 से अधिक सीएससी सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 

इस बजट में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों को नकद जमा और नकद में ऋण के रूप में प्रति सदस्य 2 लाख रुपये की सीमा भी बढ़ा दी गई है। सहकारी समितियों को नकद निकासी पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के लिए 3 करोड़ रुपये की उच्च सीमा दी गई है। वर्ष 2016-17 से पहले चीनी किसानों को किए गए भुगतान के दावों को अब 'व्यय' माना जाएगा, जिससे चीनी सहकारी समितियों को लगभग 10,000 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, अगले पाँच वर्षों में पंचायतों और गाँवों में कई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की सुविधा का भी प्रावधान किया गया है। कुल मिलाकर यह बजट अमृतकाल के संकल्प को साकार करने वाला है।